ईरान-अमेरिका वार्ता के लिए इस्लामाबाद किले में तब्दील, कड़ी सुरक्षा
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ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद 11 अप्रैल को पाकिस्तान में अहम वार्ता, इस्लामाबाद में हाई अलर्ट सुरक्षा व्यवस्था लागू।
रेड जोन सील, सड़कों पर प्रतिबंध, सार्वजनिक अवकाश घोषित कर प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की गई।
Iran/ ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए दो सप्ताह के सीजफायर के बाद अब दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण वार्ता 11 अप्रैल को पाकिस्तान में आयोजित होने जा रही है। इस बैठक को लेकर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। सरकार ने इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक आयोजन को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल 10 अप्रैल तक इस्लामाबाद पहुंच जाएंगे। इस बैठक में क्षेत्रीय तनाव, सुरक्षा मुद्दों और आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, इजरायल द्वारा लेबनान में जारी हमलों के कारण ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा में कुछ देरी की खबरें भी सामने आई हैं।
इस्लामाबाद को पूरी तरह सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। शहर का रेड जोन, जहां संसद, प्रमुख सरकारी भवन, दूतावास और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कार्यालय स्थित हैं, वहां आम नागरिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रमुख सड़कों को बंद कर दिया गया है और केवल अधिकृत वाहनों को ही आने-जाने की अनुमति है।
सुरक्षा एजेंसियों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में अतिरिक्त चौकियां स्थापित की हैं और सशस्त्र बल लगातार गश्त कर रहे हैं। ट्रैफिक को भी डायवर्ट किया गया है ताकि प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही में कोई बाधा न आए। इसके अलावा, प्रशासन ने नागरिकों की गतिविधियों को सीमित करने के लिए गुरुवार और शुक्रवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। कई स्कूल, बाजार और अन्य संस्थान बंद रखे गए हैं।
पाकिस्तान सरकार ने विदेशी प्रतिनिधियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने अमेरिकी राजदूत को आश्वासन दिया है कि सभी प्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसके तहत 30 सदस्यीय अमेरिकी अग्रिम दल पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुका है।
हवाई सुरक्षा को भी मजबूत किया गया है। पाकिस्तानी एयर फोर्स ने IL-78 ईंधन टैंकर और C-130 विमान तैनात किए हैं, ताकि प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
हालांकि, कुछ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता भी जताई है। इसके बावजूद पाकिस्तान सरकार ने दावा किया है कि वह इस बैठक को पूरी तरह सुरक्षित और सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह वार्ता मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता के लिए अहम मानी जा रही है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए इसके परिणाम पर सभी की नजरें टिकी हैं।